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Book Launch Of CA Sudha G Bhushan By Quaiser Khalid IPS Officer

Posted by on Jan 24, 2020 in Author | Comments Off on Book Launch Of CA Sudha G Bhushan By Quaiser Khalid IPS Officer

Book Launch Of  CA Sudha G Bhushan By Quaiser Khalid IPS Officer

बीएसई इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सुधा जी भूषण की बुक लॉन्च (International transactions-A Comprehensive Guide) का समारोह प्रभावशाली ढंग से सम्पन्न हुआ, सुधा भूषण मुंबई स्थित इंडिया प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट है।  समोरह का आरंभ सरस्वती वंदना की गूंज के साथ दीप प्रजवलावित करते हुए हुआ।

दीप प्रज्वलित करने का शुभ कार्य सुधा जी भूषण, सुनील पाटोदिया, विनय भूषण, सुमन अग्रवाल, नीला पारिख,जेपी गुप्ता व ए.पी. कुमार  के शुभ करकमलों से सम्पन्न हुआ। जितनी भ्व्या इमारत में समारोह हुआ, उतने ही प्रभावशाली व्यक्ति विशेष समारोह में उपस्थित थे|

Mr.Quaiser Khalid, The Inspector General of Police, Maharashtra (Chief Guest),  Ashish Chauhan, MD and CEO of BSE (Guest of Honour), Raj Kumar Joint commissioner of income tax (OSD) Circle -11(2)(2), Shankar Jhadav, MD BSE investments Limited, Ashok Kumar Garg, Ex ED  Bank of Baroda, Jagdish Prasad Gupta, successful business man and Father Sudha Bhushan,  Vinay Bhushan, Founder Taxpert Professionals, Sunil Patodia Ji , Chartered accountant and ex chairman of WIRC of ICAI.

सुधा भूषण अपने २० साल के कार्यकाल में अंगीनित कंपनीज को इंडिया में स्थापित करने, इंडिया से बाहर कंपनीज establish   करने, उनकी सर्वोत्तम स्ट्रेटजी बनाने, उनका optimum tax structuring   करने का काम कर चुके है|

बुक का विमोचन करते हुए श्री खालिद जों खुद भी एक लेखक है, ने कहा कि कोई भी बुक किसी व्यक्ति के विचारो का आयना होती है|

श्री खालिद की स्पीच की सरल भाषा ने समारोह की शोभा में चार चांद लगा दिए। बुद्धिजीवियों का एक अद्भुत सामंजस्य देखकर श्रोता भी आन्नादित थे। सुधा जी के पिता जी श्री जेपी गुप्ता जी, जों दिल्ली से विशेषकर अपनी बेटी के बुक विमोचन समारोह में सामिल होने के लिए आए थे बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।

व्यक्ति विशष श्री सुनील पाटोदिया जों देश के नमिक चार्टर्ड एकाउंटेंट है ने सुधा जी को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि सुधा जी की शुरू से ही रुचि Foreign International Tax & Laws में रहि  है एवं सुधा जी और विनय जी अपने कार्यक्षेत्र में बहुत ही सराहनीय काम कर रहे है।  सुधा जी ने अपने स्पीच के दौरान बताया कि उनके अनुभव में इंटरनेशनल टैक्स एंड त्रांसाक्शन एक कॉम्प्लेक्स लॉ नहीं है, जरूरत है तो चार कंप्लायंस मनेज करने की।

  • Allowability (w.r.t FEMA Provisions) 
  • Vulnerability (arising out of double Taxation)
  • Explainability (achieved through lucid Documentation) 
  • Accountability (required under Companies Act, 2013, Income Tax Act, 1961 and FEMA, 2000).

सुधा जी ने अपनी स्पीच को आगे बढ़ाते हुए कहा कि टैक्स जितना सिम्पल हो उतना ही अच्छा है, उन्होंने कहा कि वो अपने कार्य द्वारा मोदी जी के ५ ट्रिलियन इकॉनमी के सपने में योगदान देना चाहती है।

विनय जी ने इंटरनेशनल लॉ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि कंप्लायंस एंड डॉक्यूमेंटेशस की महत्वपूर्ण ता बहुत बढ़ गई है। एक मल्टीनेशनल कंपनी को बेशक हर लॉ का ध्यान रखना चाहिए। जन्हा तक क्रॉस बोर्डर ट्रांसाक्शन की बात है, उसके अपने नुआंसज है जो सभी  कंसर्नेड को समझने चाहिए और दुनिया दिन प्रतिदिन छोटा होता जा रहा है इसलिए जरूरत है की मल्टीनेशनल कंपनीज को अपनी पॉलिसीज, पूरे लॉज को मध्यनजर रखते हुए बनानी चाहिए।

बुक लॉन्च के साथ साथ समारोह में डिजिटल इकॉनमी की के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। चर्चा में शामिल अतिथिगणों Amit Sheth, co founder and director Aurionpro Solutions Limited., Mr. K. Balachandran Co founder IRIR, Mr. Amol Lone, Head Finance and IT, Fermenta biotech limited),  ने बहुत ही उत्तीर्ण ढंग से अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का समापन भागवत गीता के  लीडरशिप लैशंस के साथ हुआ, जिसमें श्री कृष्ण चेतन्य दास, HOD. Department of Integrated Preaching at ISKCON Juhu Mumbai., ने  गीता को कॉरपोरेट वर्ल्ड के लिए एक सूत्रधार में बांध दिया।


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Interview Of Manjusha Ranjan Book Author Of Khila Kamal Pursharth Desh Ka

Posted by on Dec 9, 2019 in Author | Comments Off on Interview Of Manjusha Ranjan Book Author Of Khila Kamal Pursharth Desh Ka

Interview Of Manjusha Ranjan Book Author Of Khila  Kamal Pursharth Desh Ka

हिन्दि की महान साहित्यकार एवमं कवित्री मंजुषा रंजन, की लिखी किताब खिला कमल पुरसार्थ देश का,महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ गोंविद के कर कमलों द्वारा विमोचन किया गया,मंजुषा रंजन ने हिन्दी कविता की अस्मर्णी सेवा की है, और अपने कलम से नये युग का अविष्कार किआ है,जन जन में देश भक्ति की चेतना जगाई,आपको बता दे की मंजुषा रंजन का रविवार दिनांक 8 दिसंबर को मुम्बई में हुआ भव्य स्वागत,बॉलीवुड और राजनीतिक छेत्र के तमाम हस्तियों से हुई मुलाकात,कई संस्थाओं द्वारा सम्मान,हाल ही में मोरिसस में 200 से ज्यादा देश के कवि वहा आये थे, जहाँ उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया, गौरतलब हो कि खिला कमल पुरसार्थ देश का इन्होंने खुद लिखा है,

 

हर ज्वलनशील मुद्दों पर बड़े ही बेबाकी से अपनी राय रखती है,चाहे वो ट्रिपल तलाक का मुद्दा हो,चाहे राम मंदिर का मुद्दा,चाहे नमामि गंगे हो,या फिर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,हाल ही हैदराबाद वाले कांड पर भी खुल कर अपनी राय रखी,और उन्होंने क्या क्या कुछ कह देखिए पूरी रिपोर्ट

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AUTHOR MANOJ YADAV TO LAUNCH HIS NEW BOOK – 101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT AT TITLE WAVES BANDRA MUMBAI ON 31ST AUGUST 2019

Posted by on Aug 29, 2019 in Author, Breaking News | Comments Off on AUTHOR MANOJ YADAV TO LAUNCH HIS NEW BOOK – 101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT AT TITLE WAVES BANDRA MUMBAI ON 31ST AUGUST 2019

AUTHOR  MANOJ YADAV TO LAUNCH HIS NEW BOOK – 101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT  AT TITLE WAVES  BANDRA MUMBAI ON 31ST AUGUST  2019

Manoj Yadav will launch his debut book ‘101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT’ from the genre Business and Management by Vitasta Publishing Private Ltd, a leader in non-fiction.  It is a 3-in-1 book for effective decision-making with 500+ strategies for business success.

101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT’ can be described as an innovative and well-researched work on Project, Quality, and Risk management, where for the first time Manoj is detailing in-depth around 98% risks affecting projects and strategies to mitigate them.

“101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT is a book which revolves around project management to survive in a world driven by volatility, uncertainty, complexity, and ambiguity (VUCA). I worked for various MNCs and saw huge gap, as professionals were finding it hard to manage their projects even after various professional certifications. There were complexities around and focus was on theoretical concepts. It is because of this I decided to write a practical book on project management, operational risk, and quality management by which people will have ready solutions to do their daily work and this will enhance their performance.” says Manoj Yadav

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FIRST EVER BOOK IN FILM MAKING Launched An Informative Book by Mr Uday Senapati

Posted by on Jun 19, 2019 in Author, News | Comments Off on FIRST EVER BOOK IN FILM MAKING Launched An Informative Book by Mr Uday Senapati

FIRST EVER BOOK IN FILM MAKING Launched An Informative Book  by Mr Uday Senapati

Mr Uday Senapati (born on 1st January 1964) from Chapra Saran Dist, Bihar. an Author and Bollywood Director belongs to the Decoria district of U.P. currently in New Delhi wrote a book on “FILM MAKING” the book contains 23 chapters in 289 pages. The First Edition of book was published by K.K. Publication vide ISBN Number 978-81-7844-296-5 date 1st May, 2017. at a grand book launching function at Mumbai Maharashtra, India.

 

Now we are here for the inauguration of the book named as “CINE-NIRMAN” in Hindi which may Bridge the gap between the people seeking as career in industry at different levels in the industry of cinema Last but not the least this book may be concerned as reference book by each and everyone involved in FILM MAKING.

फिल्म राइटर डायरेक्टर उदय सेनापति की किताब “सिने निर्माण” मुंबई में लॉन्च

फिल्म मेकिंग पर उपयोगी पुस्तक के अनावरण के अवसर पर सुनील पाल, दिलीप सेन, अली खान पुष्पा वर्मा, मदन जोशी, रमेश गोयल,की उपस्थिति

बॉलीवुड की चमक दमक से देश के कोने कोने में मौजूद सिनेमा प्रेमी प्रभावित होते हैं और दिल में इस फिल्मी दुनिया में कुछ करने का सपना सजाते हैं। लेकिन आम तौर पर वे अपना कैरियर कैसे फिल्मों में बनाएं, उन्हें कुछ पता नहीं होता। ऐसे ही सपने देखने वालों को गाइड करने के लिए फिल्म राइटर डायरेक्टर उदय सेनापति ने एक कारगर पुस्तक लिखी है जिसका नाम है “सिने निर्माण”. मुंबई के कंट्री क्लब में हुए एक शानदार इवेंट में उदय सेनापति की इस बुक को लॉन्च किया गया तो यहां बॉलीवुड की कई हस्तियां मौजूद थीं जिनमें चीफ गेस्ट के रूप में सुनील पाल और दिलीप सेन मौजूद थे साथ ही इस फंक्शन में रमेश गोयल, अली खान, पुष्पा वर्मा, मदन जोशी, हीरो राजन कुमार इत्यादि मौजूद थे। इस स्पेशल बुक लांच के अवसर पर उदय सेनापति ने कहा कि उन्हें इस किताब को लिखने में ढाई साल लगे। इसमें 23 चैप्टर्स हैं, जो निर्माता निर्देशक कलाकार लेखक बनने वालों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगे।

इस प्रोग्राम के सेलिब्रिटी मैनेजर प्रमोद सिंह थे।

1964 में बिहार के छपरा में जन्मे उदय सेनापति कई दशकों से फिल्मी दुनिया में सक्रिय रहे हैं। वह कई फिल्म पत्रिकाओं के संपादक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपने इन्हीं तमाम अनुभवों को उन्होंने इस किताब में समेट दिया है जो बेहद उपयोगी पुस्तक है।

सुनील पाल ने कहा कि यू एस में हॉलीवुड है जबकि बॉलीवुड में यू एस है, जी हां यू एस अर्थात उदय सेनापति। बॉलीवुड के इस सेनापति को सलाम जिसने इतनी बेहतरीन और उपयोगी पुस्तक लिखी है जो स्ट्रगलर के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।

इस बुक लॉन्च के अवसर पर संगीतकार दिलीप सेन ने मीडिया से कहा कि इस किताब की अहमियत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसमें फिल्म इंडस्ट्री के लगभग हर क्षेत्र के बारे में विस्तार और गहराई से जानकारी मौजूद है।

अमिताभ बच्चन के साथ खुदा गवाह जैसी फिल्म में काम कर चुके अली खान ने इस मौके पर कहा कि सबसे पहले तो मै इस किताब के लेखक उदय सेनापति जी को बहुत मुबारकबाद देना चाहूंगा और फिर यह कहना चाहूंगा कि उन्होंने इस किताब को लिखकर और छपवाकर एक नेक कदम उठाया है। यह किताब खास तौर पर उन सिने प्रेमियों के लिए एक अनमोल तोहफा है जो मुंबई से दूर यूपी बिहार एम पी या दिल्ली में रहते हैं और फिल्मी दुनिया में काम करने के इच्छुक हैं।

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Ansuman Bhagat is Quite Different Thought’s The Author

Posted by on May 6, 2018 in Author, Breaking News, Latest News | 0 comments

Ansuman Bhagat is Quite Different Thought’s The Author

In India about a lot of the author but between a motivational person whose age quite low even if he writing that the world in a different identified made. Are considering today there is in India people move on and reality to understand inspired by their an idea today very popular because they are the same believe that other people what about you think it importance not giving your thoughts value which caused from the start that distinguishes thinking person known as he your daily routine in half more than your thoughts to write expressed by which his idea people reached find.

  

He wrote the book in many topics has been written about this. And that’s why today’s society them in a good motivational as is seen.

“Our faith leads us to the success we want to achieve”

– Ansuman Bhagat

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Ansuman Bhagat’s Your Own Thought Book’s Shorts Description of Contents

Posted by on Apr 18, 2018 in Author, Breaking News, Latest News | 0 comments

Ansuman Bhagat’s Your Own Thought  Book’s Shorts Description of Contents

“Your Own Thought” book –This book has been written about various types of subjects, through which people can express their own ideas.

वास्तविकता

इस संसार में, मानवता एकमात्र प्राणी है जिसका वास्तविकता समझना मुश्किल है, यह समझना उचित नहीं है कि दुनिया में मौजूद सभी घटक एक-दूसरे की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करते हैं

किसी इंसान की वास्तविकता हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं से होती है या भविष्य पर निर्भर करती है, अगर आम तौर पर देखी जाती है, तो इसे पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता क्योंकि यह समय-समय पर बदल रहा है।

सफलता

सफलता का अर्थ केवल बड़े नाम बनाने और बड़ा पैसा बनाने से नहीं होता है, अपितु खुद के प्रति लोगो में विश्वास और सम्मान होने से होता है|

आज के इस युग में सफल उन्हें नहीं माना जा सकता जो सिर्फ अपने नाम और काम के लिए जाने जाते है| वो भले ही देश के प्रधानमंत्री हो या एक बहुत बड़ा उद्योगपति, जब तक उनके लिए समाज में विश्वास और सम्मान न हो तब तक उनके लिए ऐसी पहचान बनाना व्यर्थ है जिसके माध्यम से वे समाज में जाने जाते है

भेदभाव

भेदभाव की शुरुआत जाति और धर्म के निर्माण से ही होती है

देशों में सरकार के बनाए गए नियम केवल नाम मात्र के लिए रह गया है क्योंकि जात पात से संबंधित कई ऐसे नियम कानून आज भी है जो सिर्फ भारत देश में ही नहीं बल्कि और भी कई देशों के लोगों में भेदभाव के विचार उत्पन्न करता है जिसके परिणाम स्वरुप आज भी लोग एक-दूसरे के बीच जात-पात को लेकर आपस में दंगे फसाद करते हैं

समय की महत्ता

किसी भी जीव जंतु के समय की शुरुआत उसके जन्म से ही हो जाती है और हमारे जीवन में समय की महत्ता काफी है क्योंकि जीवन में किसी भी प्राणी के जन्म के साथ-साथ उसकी मृत्यु भी निश्चित होती है किंतु यह किसी को ज्ञात नहीं होता इसी वजह से हमें अपनी चाह और आवश्यकताओं को जीवनकाल के अंदर ही पूरी कर लेनी चाहिए अन्यथा समय किसी के लिए नहीं रुकता और ना ही किसी का मोहताज होता है

इसलिए कहा जाता है समय की बर्बादी मतलब पैसे और जीवन दोनों की बर्बादी|

भगवान का अर्थ

मनुष्य ने अपने अपने धर्म और जात से संबंधित कोई भगवान का निर्माण किया है जिसके कारण आज समाज में पूजा पाठ से संबंधित अंधविश्वास फैले हुए हैं|जब किसी के घर में कोई बच्चा बीमार पड़ता है तो उसे चिकित्सक या अस्पताल ले जाने के बजाए उसे मंदिरों में ले जाया जाता है| जहां मनुष्य के द्वारा बनाई गई काल्पनिक मूर्तियों अथवा प्रतिमाओं की पूजा की जाती है|

अगर वास्तविकता देखा जाये तो भगवान शब्द एक ऐसी सकारात्मक शक्ति है जिससे लोगो के मन्न में डर पैदा होता है क्यों की इसी शक्ति ने संसार का उत्पाती किया है| इस लिए हमे भगवान की आराधना केवल शांति प्रपात करने और सच्चाई को समझने के लिए करनी चाहिए ना  कि लोगों में अंध विश्वास फैलाने के लिए करनी चाहिए|

खुद की पहचान

इस दुनिया में प्रत्येक वस्तुओं की पहचान उसके रंग, रूप और नाम से होता है जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसके परिवार वाले उस बच्चे के पहचान के लिए उसका नामकरण करते है जिससे लोगो को यह ज्ञात हो सके कि यह कौन है| लेकिन किसी के पहचान के लिए सिर्फ उसके नाम का होना ही काफी नहीं होता है किसी व्यक्ति का नाम उसके परिवार वाले या आस-पास के रहने वाले लोग ही जान पाते है|

किन्तु खुद की पहचान का मतलब प्रसिद्धि पाने से होता है, ऐसी प्रसिद्धि जिससे लोगो के बीच आपके ऊपर विश्वास बना हो और आपका नाम पुरे समाज में एक अच्छे व्यक्ति के रूप लोग जानते हो, तब जाकर एक पूर्ण पहचान मिलती है जिसे पाकर हमे स्वयं अच्छा महसूस होता है|

जीवन की महत्वकांक्षा

मनुष्य जीवन दूसरे जीव-जंतुओं से काफी अलग है माना जाता है की जिस शक्ति ने मनुष्य जीवन की संरचना की है उन्होंने बहुत सोच बिचार कर के ही यह जीवन हम मनुष्य को दिया है हालाकि अन्य जीव जंतुओं को भी उसी शक्ति ने बनाया है जिसे इस युग के दौर में हम मनुष्यों ने उस शक्ति को भगवान का नाम दिया है

जीवन का मतलब केवल खुद के लिए जिंदगी जीने से नहीं होता, अपितु निस्वार्थ होकर दूसरों की सहायता करने से होता है| जितना हम खुद के लिए करते हैं यदि थोड़ा सहायता किसी और की करते हैं तो हमें ही अच्छा महसूस होता है, देखा जाए तो इसमें भी हमारा ही स्वार्थ होता है| यह जिंदगी स्वार्थ से भरा पड़ा है, लेकिन हम चाहे तो अपने स्वार्थ का सही फायदा उठाकर किसी की सहायता कर सकते हैं और तब जाकर जीवन जीने का सही अर्थ बनता है|

क्रोध विनाशकारक

गुस्से में लिया गया कोई भी फैसला गलत ही साबित होता है, आम तौर पर देखा जाए तो गुस्सा करना हर व्यक्ति के व्यवहार में होता ही है, वह छोटा बच्चा हो या कोई बड़ा इंसान, किसी न किसी बात को लेकर इंसान को गुस्सा आ ही जाता है किंतु हमें इस बात पर जोर देना चाहिए कि गुस्सा करना हमारे सेहत के साथ साथ दिमाग पर भी असर करता है, जिसके कारण गुस्से में कोई भी सही फैसला नहीं ले पाता और बाद में खुद को अपनी गलतियों के कारण कोसते हैं, इसलिए ऐसे हालात में शांत रहना ज्यादा सही साबित होता है

हमें अपने गुस्से को खुद के वश में रखना चाहिए, क्योंकि गुस्से से हमारा मन चिंतित होता है और मन के चिंतित होने से हमारे अंदर की सोचने समझने की शक्ति कम हो जाती है और साथ ही साथ हमारा ज्ञान भी कम हो जाता है, दूसरों की गलतियों के लिए खुद को सजा देना ही गुस्से का मतलब होता है, इसलिए हमें अपने गुस्से को काबू में रखने के लिए कभी-कभी ध्यान भी करना चाहिए, जिससे हम अपने गुस्से पर काबू कर पाएंगे

कठोर परिश्रम

इस संसार में आम इंसान से लेकर अमीर इंसान को भी अपने दैनिक दिनचर्या को चलाने के लिए या उसे और भी अच्छा बनाने के लिए मेहनत करने की आवश्यकता पड़ती ही है मेहनत करना खुद मैं एक काबिल ए तारीफ माना जाता है और मेहनत करने वाले इंसान अपनी मेहनत की वजह से वे हमेशा उच्च स्तर पर रहते हैं लेकिन जो लोग मेहनत करने से कतराते हैं वह खुद के लिए इस संसार में बोझ बनकर रह जाते हैं और ऐसे लोग अपने जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मेहनत तो करते हैं किंतु उंहें अपने परिणाम मिलने की जल्दी पड़ी रहती है वैसे लोगों को धैर्य से काम करना चाहिए और अपने मेहनत के लिए अधिक सोचना चाहिए क्योंकि जिस प्रकार मेहनत करने से पत्थर को भी मुहूर्त का आकार दिया जा सकता है ठीक वैसे ही इंसान के लिए इस संसार में कोई भी काम असंभव नहीं है अगर उस काम के लिए पुरजोर मेहनत किया जाए

बचपन

किसी भी मनुष्य के बचपन का जीवन उसे कभी नहीं भूलना चाहिए यह एक ऐसा पल होता है जिसमें हमें ना तो सही गलत का ठीक से समझ होता है और ना ही झूठ और सच का, उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमें बहुत चीजों का ज्ञान होता है किंतु हम समय के साथ-साथ अपने बचपन के बीते पल को भी भुला देते हैं, किसी भी इंसान के बचपना का जीवन निस्वार्थ पूर्ण होता है इस उम्र में हमें जिस चीज की इच्छा होती है उसे बेझिझक मांग लेते हैं और हमें बचपन में यही सिखाया जाता है कि जब तुमसे कोई कुछ मांगे तो उसे बेझिझक दे देना चाहिए और यदि तुम्हें किसी चीज की इच्छा हो तो तुम भी उसे बेझिझक मांग सकते हो, लेकिन जब हम बड़े हो जाते हैं तो इन सब बातों का कोई मतलब नहीं समझते और समय के साथ-साथ बचपन के बीते पल को भुला कर बढ़ते चले जाते हैं बचपन ही इंसान का सच्चा और अनमोल पल होता है इसलिए हमें अपने बचपन को साथ में लेकर चलना चाहिए क्योंकि इसमें कोई स्वार्थ नहीं होताज्ञान

जिस प्रकार समुंदर और आकाश की कोई सीमा रेखा नहीं होती ठीक उसी प्रकार ज्ञान की भी कोई सीमा रेखा नहीं होती हम जितना चाहे उतना अपने ज्ञान की कोस को बढ़ा सकते हैं जब तक हम जीवित है, और ज्ञान पाने का मतलब केवल शिक्षा से नहीं है बल्कि हम जिस समाज में रहते हैं उस समाज से जुड़ी सभी ज्ञान को प्राप्त करना काफी जरूरी है जिससे हमारे अंदर समाज के लोगों के रहने का तौर तरीका और मान-सम्मान करने का ज्ञान मिल सके क्योंकि सिर्फ शिक्षा का ज्ञान पाकर हम भले ही बड़ा इंसान तो बन जाएंगे लेकिन जब तक समाज और समाज के रहने वाले लोगों के लिए मान सम्मान की भावना हमारे अंदर ना हो तब तक एक काबिल इंसान नहीं बन सकते

हमारा ज्ञान तब और बढ़ जाता है जब आप अपना ज्ञान किसी और को देते हैं लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो अपना ज्ञान किसी को नहीं देते यह सोचकर कि कहीं उनका ज्ञान कम ना हो जाए लेकिन यह कुछ लोगों की गलत धारणा होती है अगर देखा जाए तो आपके हाथ में रखा रोटी कोई भी छीन सकता है लेकिन आपका ज्ञान आपसे कोई नहीं छीन सकता क्योंकि यह सदैव आपके साथ रहता है

मरने के बाद शरीर भी साथ नहीं देता, किंतु ज्ञान हमेशा साथ देता है

संस्कार

संस्कार शब्द आज के युग में लोगों के लिए सिर्फ दिखावा है केवल कुछ समय के लिए दिखावा और सिर्फ अपने आप को अच्छा कहलाने के लिए है ताकि दूसरों के सामने हम इज्जत दार और संस्कारी कहला सके, किंतु इन सब का कोई महत्व नहीं रहता क्योंकि जब तक हमारे अंदर से दूसरों के लिए आदर और सम्मान की भावना ना हो तब तक हम संस्कारी कहलाने के लायक नहीं हैं और रही बात संस्कार की तो यह शुरु से ही एक इंसान के अंदर होने चाहिए दिखावटी ना हो, जो संस्कार शुरू से ही हमारे अंदर होता है उसे किसी को दिखाने या बताने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि जिस व्यक्ति के अंदर अच्छे संस्कार हो वह स्वयं दिख जाता है

जिस प्रकार एक अंडे के ट्रे में सिर्फ अंडा होता है यदि उसमें एक सेब का फल डाल दे तो हमारी दृष्टि पहले उस ट्रे में रखें सेब के फल पर ही जाएगा इसलिए हमें अपने अंदर अच्छे संस्कार लानी चाहिए और हमें यह अपने परिवार वालों से या अपने आसपास के बुजुर्ग लोगों से सीख सकते हैं

लगाव

लगाव का अर्थ है दो या दो प्राणियों के बीच का संबंध जिसके कारण वे एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं ठीक उसी प्रकार हम इंसानों के बीच भी लगा होता है जिसके कारण हम लंबे समय तक एक दूसरे से जुड़े रहते हैं मित्र, परिवार या पर्यावरण से जुड़े कई घटक है जिससे हमारा लगाव होता है आमतौर पर हमें यह देखने को मिलता है जब हम लंबे अरसे से किसी एक स्थान पर रहते हैं और अचानक वहां से जाने के बाद हमें थोड़ा अकेलापन महसूस होता है क्योंकि ऐसा होने का मुख्य कारण लगाव है या किसी निश्चित वस्तु या प्राणी के बीच नहीं होता यह संसार की किसी भी प्राणी से हो सकता है इस संसार में सबसे ज्यादा लगाव इंसान को अपने माता पिता और परिवार वालों के बीच होता है जिन्हे हम कभी अपनों से दूर होता नहीं देख सकते इसलिए हमें अपने माता पिता और परिवार वालों की इज्जत हमेशा करनी चाहिए

अगर आपको किसी से बहुत ज्यादा लगाव है तो आप उसे कभी खुद से अलग होने ना दें क्योंकि दूरियां बढ़ने से लगाव कम हो जाता है

मृत्यु

प्रतिदिन इस संसार में लाखों लोगों की मृत्यु होती है अर्थात कितनों के घर उजड़ जाते हैं कितने लोग अपनों को छोड़कर जाने वालों के पीछे अपना आंसू बहाते हैं ऐसा सब लगाव के कारण होता है किंतु कुछ समय बीतने के बाद सब कुछ पहले जैसा ही हो जाता है

इस संसार में जो भी जन्म लेता है उसे एक ना एक दिन मरना ही होता है और इसे बदला नहीं जा सकता किसी के मरने के बाद उसके बारे में सोच कर खुद तकलीफ में रखना उचित नहीं है मरने के बाद की जिंदगी क्या है किसी को इसके बारे में ज्ञात नहीं लेकिन जब तक हम जीवित है तब तक हमें इस संसार का सुख भोगना चाहिए क्योंकि जिंदगी बहुत अनमोल है एक बार ही मिलती है और एक बार मरने के बाद किसी के लिए लौटकर वापस नहीं आती

सुनना और ध्यानपूर्वक सुनना

ईश्वर ने इंसानी शरीर की संरचना काफी सोच समझकर की है जिसके कारण हम खुद को दूसरे जीवित प्राणियों से भिन्न समझते हैं आंख, मुंह, नाक, कान और त्वचा हमारे ज्ञानेंद्रिय अंग होते है जिसमें कान का उपयोग हम किसी भी ध्वनि को सुनाने के लिए करते हैं लेकिन मनुष्य के व्यवहार के कारण सुनना और ध्यानपूर्वक सुनना दो प्रकार में हैं हमारे आस-पास होने वाली घटनाओं से उत्पन्न ध्वनि का सुनाई देना किंतु यह हमें स्पष्ट रुप से समझ नहीं आता सुनना कहलाता है किंतु जब हम किसी ध्वनि को ध्यानपूर्वक सुनते हो और उस ध्वनि को स्पष्ट रुप से समझ भी सकते हो तो यह उस सुनना से भिन्न होता है

हमें किसी भी ध्वनि को स्पष्ट रूप से सुनकर उसे महसूस करके समझना काफी आवश्यक है ध्यानपूर्वक सुनने से हमारे सोचने समझने की शक्ति काफी अधिक होती है हम जितना बातें करते हैं उससे कहीं ज्यादा असर दूसरों की बातें सुनने से होता है

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